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क्या आप पढना चाहेंगें ?

आजकल हिन्दी ब्लागिंग में लोग क्या पढ रहे हैं, यह ठीक से समझ में नहीं आता. अनुमान तो मेरा यही है कि,ज्यों-ज्यों ब्लागविद्या का विस्तार होता जाता है,पाठक गहरी चीजों से दूर होते जा रहे हैं. मगर, इन सुभाषितों में गंभीर कहे जा सकने वाला तो ऎसा कुछ भी नहीं है.लेकिन इनमें कुछ ऎसा जरूर है कि जो ह्रदय तथा बुद्धि को गुदगुदाना जानता हैं. इसलिए, मुझे थोडी आशा बनी रहती है है कि ये सुभाषि पढे जायेंगें.......

1. व्यवस्था घर की सुन्दरता है; संतोष घर की बरकत है; आतिथ्य घर की शान है; धर्मशीलता घर का कलश है---श्री ब्रह्मचैतन्य


2. आँखें सबने पाई हैं, लेकिन नजर किसी किसी ने------मैकिया वैली

3. जीवन के न्याय पर से मैं अपना विश्वास कैसे खो दूँ, जब कि मखमलों पर सोने वालों के स्वपन जमीन पर सोने वालों के स्वपनों से सुन्दरतर नहीं होते-----खलील जिब्रान


4. ईश्वर की चक्की बडी धीमे चलती है, मगर बारीक पीसती है----जर्मन कहावत

5. अच्छा पडोसी आशीर्वाद है और बुरा पडोसी अभिशाप---हैसिएड

6. अगर हम गिरते हैं तो अधिक अच्छी तरह से चलने का रहस्य सीख जाते हैं----अरविन्द


7. ईश्वर कभी बहरा नहीं होता, सिवाय जब कि आदमी का दिल ही गूँगा हो----क्वार्ल्स


8. हम जिसकी आराधना करते हैं वैसे हो जाते हैं. प्रार्थना का अर्थ इससे ज्यादा नहीं है-----महात्मा गाँधी


9. चिडियों की तरह हवा में उडना और मछलियों की तरह पानी में तैरना सीखने के बाद अब हमें इन्सान की तरह जमीन पर चलना सीखना है------राधाकृ्ष्णन


10. यह ज्यादा अक्लमन्दी की बात हो कि हम उस ईश्वर की बातें कम करें जिसे हम समझ नहीं सकते, और उन पारस्परिक लोगों की बातें ज्यादा करें जिन्हे हम समझ सकते हैं------खलील जिब्रान


11. स्वयं अपने प्रति सच्चे रहोगे तो गैर के प्रति झूठे नहीं हो सकोगे---स्वामी रामतीर्थ

12. जो मनचाहा बोलता है, उसे अनचाहा सुनना पडता है-----संस्कृत सूक्ति

4 टिप्पणियाँ:

Ratan Singh Shekhawat ने कहा…

बड़े तकड़े चोर हो ! पंडित जी के पोस्ट प्रकाशित करते ही चुरा डाली !!

सम्पादक ने कहा…

भाई थम तो म्हानै चोरां के सरदार दिखो :)

पं.डी.के.शर्मा"वत्स" ने कहा…

लगे रहिये. वैसे भी क्या फर्क पडता है, पोस्ट चाहे हमारे नाम से छपे या आपके नाम से :)

गजेन्द्र सिंह ने कहा…

बढ़िया बात कही है पंडित जी ने ... मकसद तो सिर्फ ज्ञान फैलाना है वो चाहे आपके नाम से मिले या पंडित जी के .....

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